खुसूर-फुसूर
जिलाशिक्षा या जिला शिक्षा…
गर्मी के दौर में स्कूलों के संचालन को लेकर प्रदेश के तमाम जिलों ने आदेश जारी करते हुए तापमान की अधिकता को देखते हुए निम्नतम कक्षाओं के बच्चों के अवकाश घोषित किए हैं। आसपास के जिलों के साथ इस दौरान प्रदेश के कई बडे एवं छोटे जिलों के आदेश पर नजर गई। कुछ जिलों में नर्सरी से लेकर पांचवी एवं कुछ जिलों में नर्सरी से लेकर 8 वीं तक के विद्यार्थियों के लिए अगले 4 दिनों के लिए अवकाश घोषित किए गए हैं। खास बात यह रही की प्रदेश के अन्य जिलों की अपेक्षा नटखट माखन चोर की शिक्षा स्थली के ज्ञान वान विभाग ने अपना आदेश ही जारी किया। उसे पलटकर देखना भी वाजिब नहीं समझा गया। यहां आदेश जिलाशिक्षा अधिकारी ने निकाला और शेष जिलों में जिला शिक्षा अधिकारी ने। ये हिन्दी प्रदेश एवं शुद्ध् हिन्दी बोलचाल का जिला होने के उपरांत भी जिलाशिक्षा की स्थिति पालकों ने आदेश में देखी। आदेश में हिन्दी की स्थिति देखकर पालकों में खुसूर –फुसूर सूनी जा रही है कि कान्वेंट की शिक्षा का असर इतना गहराया हुआ है कि अब इससे पीछा छुडाने में ही एकाध दशक तो लगना ही है। इसी के चलते बच्चों को अंग्रेजी विषय में तो अच्छे नंबर आते हैं लेकिन हिन्दी में उन्हें नंबर कैसे मिल रहे हैं इस पर भी सवाल कायम हो रहे हैं। बच्चों की कापियों में वर्णानुगत कमियां उनके नंबर से बिल्कुल भी समानता नहीं रखती है। पालकों का मानना है कि जब जिला कार्यालय में ही यह हाल हैं तो उसकी शाखाओं में जो हो रहा है वो सही ही हो रहा है।